एकता शिक्षा और प्रकृति संरक्षण से ही होगा आदिवासी समाज का सर्वांगीण विकास- विधायक इन्द्र शाह मंडावी

एकता, शिक्षा और प्रकृति संरक्षण से ही होगा आदिवासी समाज का सर्वांगीण विकास : विधायक इंद्रशाह मंडावी
मोहला मानपुर: आदिवासी मूल निवासी दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में मुख्य अतिथि एवं प्रमुख वक्ता विधायक इंद्रशाह मंडावी ने कहा कि यह दिन केवल उत्सव मनाने का अवसर नहीं, बल्कि समाज की दिशा और भविष्य को लेकर चिंतन करने का भी दिन है। उन्होंने कहा कि एकता से ही समाज का विकास संभव है और अपनी संस्कृति, परंपरा तथा प्रकृति को बचाते हुए विकास की राह पर आगे बढ़ना होगा।
मानपुर के रामायण मंच में आयोजित भव्य आदिवासी मूलनिवासी कार्यक्रम को संबोधित करते हुए विधायक मंडावी ने कहा कि जब पूरी दुनिया विकास की अंधी दौड़ में प्रकृति का अंधाधुंध विनाश कर रही थी, तब आदिवासी समाज सदियों से जल, जंगल और जमीन के संरक्षण की परंपरा को निभाता आया है। प्रकृति आदिवासी जीवन का अभिन्न हिस्सा है और यही परंपरा आज पूरी दुनिया के लिए प्रेरणा बन सकती है।
भगवान बिरसा मुंडा एवं शहीद वीर नारायण सिंह को किया गया याद
आदिवासी समाज के वीर नायकों भगवान बिरसा मुंडा और वीर नारायण सिंह के बलिदान को याद करते हुए कहा कि इन महान नायकों ने समाज और देश के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर किया। उनके संघर्ष और त्याग को नई पीढ़ी तक पहुंचाना हम सभी की जिम्मेदारी है। विधायक ने कहा कि आज सबसे बड़ी चुनौती अपनी संस्कृति और पहचान को सुरक्षित रखने की है। इसके साथ ही बच्चों को बेहतर शिक्षा दिलाना भी समाज की बड़ी जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि हमारे बच्चे पढ़-लिखकर अच्छे नागरिक बनें, इंजीनियर, डॉक्टर और वैज्ञानिक बनें तथा हर क्षेत्र में समाज का नाम रोशन करें।
उन्होंने कहा कि आज आदिवासी समाज के बच्चे शिक्षा और प्रतियोगिता के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। यह बदलाव समाज के उज्ज्वल भविष्य का संकेत है। विकास का मूल मंत्र केवल आर्थिक उन्नति नहीं, बल्कि ऐसा सर्वांगीण विकास है जिसमें गांवों तक सड़क, अस्पताल, शिक्षा और अन्य मूलभूत सुविधाएं पहुंचें। उन्होंने कहा कि विकास की इस यात्रा में शिक्षा सबसे महत्वपूर्ण आधार है। शिक्षित समाज ही अपने अधिकारों को समझ सकता है, अपनी संस्कृति और परंपराओं को सुरक्षित रख सकता है तथा आने वाली पीढ़ियों के लिए बेहतर भविष्य का निर्माण कर सकता है।






कार्यक्रम में भोजेश शाह मंडावी ने आदिवासी समाज की संस्कृति, परंपराओं और प्रकृति के साथ उसके गहरे संबंध को रेखांकित करते हुए जल, जंगल और जमीन के संरक्षण का संकल्प लिया गया। वक्ताओं ने कहा कि आधुनिक विकास और प्रकृति संरक्षण के बीच संतुलन बनाकर ही आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित और समृद्ध भविष्य तैयार किया जा सकता है।
डीजे की धुन पर गूंजा आदिवासी समाज का स्वर
हजारों आदिवासी युवाओं ने एकजुट होकर डीजे की धुन पर थिरकते हुए अपनी संस्कृति, पहचान और अधिकारों की आवाज बुलंद की। पारंपरिक वेशभूषा में सजे युवाओं ने उत्साह और जोश के साथ कार्यक्रम में भाग लिया। हाथों में तख्तियां और नारों के साथ उन्होंने आदिवासी समाज की एकता और जागरूकता का संदेश दिया। ढोल-नगाड़ों और संगीत की गूंज से पूरा माहौल उत्सवमय हो गया। युवाओं ने कहा कि उनकी संस्कृति और परंपराएं उनकी पहचान हैं, जिन्हें संरक्षित करना सभी की जिम्मेदारी है। इस विशाल आयोजन ने आदिवासी समाज की एकजुटता, शक्ति और अपने अधिकारों के प्रति बढ़ती जागरूकता को स्पष्ट रूप से प्रदर्शित किया।
आदिवासी दिवस में उत्कृष्ट प्रतिभाओं का किया गया सम्मान
आदिवासी समाज के द्वारा समाज के उत्कृष्ट प्रतिभावान छात्र छात्राओं का स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मान किया गया, सम्मान समारोह में रोचक यह रहा कि जो बच्चे ने नीट की परीक्षा उत्तीर्ण किए है उन्होंने बताया कि वे स्वयं सामान्य परिवार से आते है, बावजूद उनके परिजनों ने उनके शिक्षा के लिए कोई समझौता नहीं किया है पढ़ाया जिससे आगे बढ़ पाए है, उन्होंने अन्य बच्चों एवं पालकों को भी मन लगाकर पढ़ाई करने के लिए प्रोत्साहित किया।
मानपुर से जिब्राइल खान की रिपोर्ट