“विरोध प्रदर्शन में विधायक नदारद, अब बाद में वोट चोरी का बहाना तो नहीं?” : पवन गुप्ता. दोनों विधानसभा के विधायक गायब, कांग्रेस का विरोध मार्च बना नेतृत्वहीन प्रदर्शन : पवन गुप्ता

बिना विधायक के हुआ प्रदर्शन कांग्रेस के राजनीतिक नेतृत्व पर बड़ा सवाल : पवन गुप्ता
अंबागढ़ चौकी। मोहला में सोमवार को मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के विरोध में कांग्रेस द्वारा किए गए विरोध मार्च एवं पुतला दहन प्रदर्शन को लेकर नगर पंचायत अंबागढ़ चौकी के उपाध्यक्ष पवन गुप्ता ने कांग्रेस पर तीखा तंज कसा। उन्होंने कहा कि जिस प्रदर्शन में क्षेत्र की दोनों विधानसभा सीटों के विधायक ही नजर नहीं आएं, वह कांग्रेस के संगठन और नेतृत्व की स्थिति पर अपने आप में सवाल खड़े करता है।
पवन गुप्ता ने कहा कि कांग्रेस ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त के विरोध में प्रदर्शन तो किया, लेकिन प्रदर्शन का नेतृत्व करने वाले क्षेत्र के निर्वाचित जनप्रतिनिधि ही मौके पर मौजूद नहीं रहे। ऐसे में कांग्रेस को पहले यह जवाब देना चाहिए कि आखिर अपने ही आंदोलन में उसके विधायक क्यों दिखाई नहीं दिए।
उन्होंने कहा, “जिस प्रदर्शन में दोनों विधानसभा के विधायक नहीं हैं, उस प्रदर्शन में कांग्रेस किस नेतृत्व के साथ जनता के सामने खड़ी है? पुतला जलाने से पहले कांग्रेस को अपने राजनीतिक नेतृत्व की स्थिति पर आत्ममंथन करना चाहिए।”
पवन गुप्ता ने कहा कि लोकतंत्र में किसी संवैधानिक संस्था या निर्वाचन प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाना राजनीतिक दलों का अधिकार है, लेकिन सवाल तथ्यों और प्रमाणों के साथ उठाए जाने चाहिए। केवल विरोध प्रदर्शन, नारेबाजी और पुतला दहन को राजनीति का विकल्प नहीं बनाया जा सकता।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस को यह भी स्पष्ट करना चाहिए कि 2024 के लोकसभा चुनाव के परिणामों को मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार से किस आधार पर जोड़ा जा रहा है। उन्होंने याद दिलाया कि ज्ञानेश कुमार ने 15 मार्च 2024 को निर्वाचन आयुक्त के रूप में कार्यभार संभाला था, जबकि 19 फरवरी 2025 को उन्होंने मुख्य निर्वाचन आयुक्त का पद संभाला। इसलिए 2024 लोकसभा चुनाव के परिणामों को उनके मुख्य निर्वाचन आयुक्त के रूप में लिए गए निर्णयों से जोड़ना कालक्रम की दृष्टि से उचित नहीं है।

पवन गुप्ता ने कहा कि 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनावों के आंकड़ों को किसी एक अधिकारी के खाते में डालने के बजाय कांग्रेस को अपने राजनीतिक प्रदर्शन का ईमानदारी से विश्लेषण करना चाहिए। जनता अलग-अलग चुनावों में अलग-अलग जनादेश देती है और उसके पीछे राजनीतिक, सामाजिक, संगठनात्मक तथा स्थानीय अनेक कारण हो सकते हैं।
उन्होंने कांग्रेस नेतृत्व पर तंज कसते हुए कहा कि “कांग्रेस को पुतला दहन की राजनीति से पहले यह देखना चाहिए कि उसके अपने संगठन में नेतृत्व और कार्यकर्ताओं के बीच तालमेल कितना मजबूत है। अगर अपने ही प्रदर्शन में क्षेत्र के दोनों विधायक साथ खड़े नहीं दिखते, तो सवाल निर्वाचन आयोग से पहले कांग्रेस के संगठन और नेतृत्व से पूछा जाना चाहिए।”
पवन गुप्ता ने कहा कि किसी भी आंदोलन की राजनीतिक ताकत केवल भीड़ या नारों से नहीं, बल्कि उसके नेतृत्व और मुद्दे की तथ्यात्मक मजबूती से तय होती है। “विरोध करना कांग्रेस का अधिकार है, लेकिन विरोध के मंच पर अपने निर्वाचित प्रतिनिधियों की अनुपस्थिति कांग्रेस के लिए आत्ममंथन का विषय जरूर है।”
उन्होंने कहा कि कांग्रेस को चाहिए कि वह पुतला दहन से आगे बढ़कर अपने संगठन, नेतृत्व, रणनीति और जनता के बीच अपनी राजनीतिक स्थिति पर गंभीरता से विचार करे। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि बाद में कांग्रेस विधायक दल के नेता और राहुल गांधी यह कह सकते हैं कि “वोट चोरी हो गया”, जबकि इस प्रदर्शन में कांग्रेस का अपना विधायक ही गायब रहा। लोकतंत्र में जनता के जनादेश का जवाब विरोधियों का पुतला जलाकर नहीं, बल्कि अपनी राजनीतिक कमियों को पहचानकर और जनता का विश्वास हासिल करके दिया जाता है।
अंत में पवन गुप्ता ने कहा, “आज का प्रदर्शन कांग्रेस के लिए निर्वाचन आयोग के विरोध से ज्यादा उसके अपने राजनीतिक नेतृत्व की परीक्षा बन गया। दोनों विधानसभा के विधायक साथ नहीं दिखे—कांग्रेस को इस सवाल का जवाब जनता को देना चाहिए कि आखिर ऐसा क्यों हुआ।”
— पवन गुप्ता
उपाध्यक्ष, नगर पंचायत अंबागढ़ चौकी
मोहला से योगेन्द्र सिंगने की रिपोर्ट
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