किसी भी देश के लिए उसकी धरोहर उसकी अमूल्य संस्कृति होती है। जिन्हें देखने के लिए देश-विदेश से लाखों पर्यटक प्रत्येक वर्ष एक देश से दूसरे देश, एक राज्य से दूसरे राज्य जाते हैं। :-प्रशांत कुमार क्षीरसागर

किसी भी देश के लिए उसकी धरोहर उसकी अमूल्य संस्कृति होती है। जिन्हें देखने के लिए देश-विदेश से लाखों पर्यटक प्रत्येक वर्ष एक देश से दूसरे देश, एक राज्य से दूसरे राज्य जाते हैं। :-प्रशांत कुमार क्षीरसागर
सभ्यताओं और इतिहास की संस्कृति को जीवित रखने के उद्देशय से प्रत्येक वर्ष 18 अप्रैल को पूरे विश्व में विश्व धरोहर दिवस मनाया जाता है।
भिलाई:-
विश्व धरोहर दिवस 2023 – 18 अप्रैल (मंगलवार)
किसी भी देश के लिए उसकी धरोहर उसकी अमूल्य संस्कृति होती है। किसी भी देश की पहचान, वहां की सभ्यता की जानकारी इन धरोहरों से ही पता चलती है। आज देश का गौरव बढ़ाने का काम यह धरोहरें ही कर रही हैं। जिन्हें देखने के लिए देश-विदेश से लाखों पर्यटक प्रत्येक वर्ष एक देश से दूसरे देश, एक राज्य से दूसरे राज्य जाते हैं। यदि यह धरोहर यह विरासत ना हो तो हम कभी किसी का इतिहास नहीं जान पाएगें। अतीत हर व्यक्ति, हर देश के लिए बहुत जरुरी है। इतिहास में कब, क्या, कहां घटित हुआ यह जानना अति आश्यक है। इन्हीं घटनाओं, सभ्यताओं और इतिहास की संस्कृति को जीवित रखने के उद्देशय से प्रत्येक वर्ष 18 अप्रैल को पूरे विश्व में विश्व धरोहर दिवस मनाया जाता है। आईसीओएमओएस (स्मारकों और स्थलों के लिए अंतर्राष्ट्रीय परिषद) ने 18 अप्रैल 1 9 82 को ट्यूनीशिया में एक संगोष्ठी का आयोजन किया।

जिसमें यह सुझाव दिया गया कि सभ्यता को बचा कर रखने के लिए और इन धरोहरों के संरक्षण के लिए एक विशेष दिन चुनना आवश्यक है ताकि जनता को जागरुक कर सकें। जिसके परिणाम स्वरुप 18 अप्रैल का दिन चुना गया। जिसे प्रत्येक वर्ष विश्व धरोहर दिवस के रुप में मनाया जाता है ताकि हमारी आने वाली पीढ़ी अपनी सभ्यता और इतिहास से भली भांति परिचित हो सके। इस वर्ष विश्व धरोहर दिवस 18 अप्रैल (रविवार) को मनाया जाएगा। विश्व धरोहर दिवस का इतिहास
विश्व विरासत दिवस सर्वपर्थम 18 अप्रैल, 1982 को ट्यूनीशिया में ‘इंटरनेशनल काउंसिल ऑफ मोनुमेंट्स एंड साइट्स’ द्वारा मनाया गया था। एक अंतर्राष्ट्रीय संगठन ने 1968 में विश्व प्रसिद्ध इमारतों और प्राकृतिक स्थलों की रक्षा के लिए एक प्रस्ताव रखा था।

इस प्रस्ताव को संयुक्त राष्ट्र के सामने 1972 में स्वीडन की राजधानी स्टॉकहोम में एक अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन के दौरान रखा गया, जहाँ ये प्रस्ताव पारित हुआ। इस तरह विश्व के लगभग सभी देशों ने मिलकर ऐतिहासिक और प्राकृतिक धरोहरों को बचाने की शपथ ली। “यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज सेंटर” अस्तित्व में आया। 18 अप्रैल, 1978 में पहले विश्व के कुल 12 स्थलों को विश्व विरासत स्थलों की सूची में शामिल किया गया। इस दिन को तब “विश्व स्मारक दिवस के रूप में मनाया जाता था। लेकिन यूनेस्को ने वर्ष 1983 नवंबर माह में इसे मान्यता प्रदान की और इस दिवस को “विश्व विरासत या धरोहर दिवस” के रूप में बदल दिया। वर्ष 2011 तक सम्पूर्ण विश्व में कुल 911 विश्व विरासत स्थल थे, जिनमे 704 ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक, 180 प्राकृतिक और 27 मिश्रित स्थल हैं। अस दिन पूरी दुनिया में विरासत की विविधता का जश्न मनाती है। भारत की विश्व विरासत
भारत एक ऐसा देश है
जिस पर विभिन्न धार्मिक और सांस्कृतिक पृष्ठभूमि जैसे आर्यों, गुप्तों, मुगलों, अंग्रेजों इत्यादि के शासकों द्वारा शासन किया गया है और उन सभी ने स्मारकों और स्थलों के रूप में भारतीय मिट्टी पर अपने निशान छोड़े हैं। चाहें वो शाहाजहां द्वारा बनाया गया प्रेम का प्रतिक ताजमहल हो या लालकिला, कुतुबद्दीन द्वारा बनाया गया कुतुबमीनार हो या चारमीनार, हुमायु टोंब हो या छत्रपति शिवाजी टर्मिनल यह सब धरोहरें हमें भारत की प्राचीन संस्कृति से परिचित कराती है। इनके संरक्षण के कारण ही यह अब तक सुरक्षित व पुनर्जीवित हैं। विश्व धरोहर दिवस में इन विभिन्न सभ्यताओं से जुड़ने का एक अवसर उपलब्ध कराता है। भारत के तो हर घरोहर के पीछे एक बड़ा इतिहास छिपा है। जो भारत को विश्व के सामने स्वंय को प्रस्तुत करने का अवसर उपलब्ध कराता है।

18 अप्रैल वर्ल्ड हेरिटेज डे ऐतिहासिक धरोहर विश्व विरासत दिवस भ्रमण स्थल संजो ने की प्रेरणा देता है 18 अप्रैल 2023 प्रतिवर्ष 18 अप्रैल विश्व धरोहर दिवस मनाया जाता है इसका मुख्य उद्देश्य पर्यटक प्रेमी प्रकृति प्रेमी टूरिज्म प्रशांत कुमार क्षीरसागर जानकारी दी मानव सभ्यता से जुड़े सांस्कृतिक स्थल की विरासत को लुप्त होने से बचाने विविध ऐतिहासिक धरोहर संरक्षण तथा उनके बारे में लोगों को जागरूक प्रचार प्रसार करना एवं जागरूकता लाना ताकि आने वाली पीढ़ी उन्हें देख सके गले लगा सके विश्व की समृद्ध विरासत आने वाली पीढ़ी और संरक्षण के बारे में बढ़ावा देना पर्यटन प्रेमी प्रशांत कुमार क्षीरसागर विश्व धरोहर दिवस की थीम 18 अप्रैल 2023 की इस वर्ष की थीम है विश्व विरासत दिवस विरासत परिवर्तन के विषय के तहत मनाया जाएगा भारत 40 विश्व धरोहर विरासत है 32 सांस्कृतिक 7 प्राकृतिक एक मिश्रित धरोहर है विश्व धरोहर दिवस का अर्थ है यूनेस्को विश्व धरोहर विश्व के सभी स्थलों वन क्षेत्र मरुस्थल स्मारक भवन शहर मंदिरों किला शहरों को कहा जाता है जिसका चयन समिति इन स्थलों को देखरेख यूनेस्को की टीम द्वारा तत्वाधान में सर्वे करती है विश्व का पहला विश्व धरोहर गे ला पा द्वीप समूह

