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दल्लीराजहरा ब्लाक कांग्रेस कमेटी ने प्रसिद्ध पंडवानी गायिका पद्म विभूषण डॉ. तीजन बाई को दी श्रद्धांजलि



छत्तीसगढ़ की कला जगत से सुबह-सुबह दुखद खबर आई है. प्रसिद्ध पंडवानी गायिका पद्म विभूषण डॉ. तीजन बाई ने दुनिया को अलविदा कह दिया है. वह लंबे वक्त से बीमार चल रही थी. रविवार सुबह करीब 3:15 बजे उन्होंने रायपुर एम्स में अंतिम सांस ली |

उन्होंने छत्तीसगढ़ की लोक कला और पंडवानी गायन को वैश्विक पहचान दिलाई. महाभारत की कथाओं को अपनी दमदार आवाज़, अभिनय और प्रभावशाली प्रस्तुति के माध्यम से उन्होंने जीवंत बनाया. उनकी कला ने भारत के साथ-साथ एशिया, यूरोप, अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया सहित अनेक देशों के दर्शकों को मंत्रमुग्ध किया. उनके प्रयासों से छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति को अंतरराष्ट्रीय मंच पर विशेष सम्मान मिला.
भारतीय लोककला में उनके अतुलनीय योगदान के लिए भारत सरकार ने उन्हें 1988 में पद्मश्री, 2003 में पद्म भूषण और 2019 में पद्म विभूषण से सम्मानित किया. इसके अलावा उन्हें संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार, नृत्य शिरोमणि, कला शिरोमणि समेत कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सम्मान प्राप्त हुए. विभिन्न विश्वविद्यालयों ने उन्हें मानद डी.लिट. (डॉक्टरेट) की उपाधि से भी सम्मानित किया था.
डॉ. तीजन बाई का निधन छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत के लिए एक अपूरणीय क्षति माना जा रहा है. उन्होंने अपनी अद्भुत प्रतिभा और अथक साधना से पंडवानी को गांव की चौपाल से निकालकर विश्व मंच तक पहुंचाया. उनके जाने से लोककला जगत ने अपना एक अमूल्य नक्षत्र खो दिया है.
सुप्रसिद्ध पंडवानी गायिका तीजन बाई जी के निधन से अत्यंत दुख हुआ है. उन्होंने छत्तीसगढ़ की इस लोक कला को अपनी भव्य प्रस्तुति से दुनियाभर में एक विशिष्ट पहचान दिलाई. उनका जाना कला एवं संस्कृति जगत के लिए एक अपूरणीय क्षति है. उक्तआशय के उद्गार ब्लॉक कांग्रेस कमेटी दल्ली राजहरा के अध्यक्ष रती राम  कोसमा ने तीजन बाई की श्रद्धांजली समारोह में उपस्थित जनों से कहा कि तीजनबाई  का ज़ाना छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक धरोहर के लिए अपूरणीय क्षति है।
रतिराम कोसमा
अध्यक्ष
ब्लाक कांग्रेस कमेटी दल्ली राजहरा

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