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राजसी ठाठ-बाठ में रहने वाले प्रधानमंत्री जनता से अपने खर्च, कार्यक्रम-आयोजनो और खानपान में कटौती कर देशहित में त्याग मांग रहे हैं यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण और हास्यप्रद है- रत्तीराम कोसमा

राजसी ठाठ-बाठ में रहने वाले प्रधानमंत्री जनता से अपने खर्च, कार्यक्रम-आयोजनो और खानपान में कटौती कर देशहित में त्याग मांग रहे हैं यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण और हास्यप्रद है- रत्तीराम कोसमा

दल्ली राजहरा:-

निवर्तमान पांच राज्यों के चुनाव में और पुरे १२ वर्षो से पुरी रईसी में सरकार चलाने वाले, बंगाल में भव्य शपथ ग्रहण निपटाकर और सैकड़ों गाड़ीयों के काफिले के साथ रोड शो कर पांच देशों की यात्रा में जाने से पहले प्रधानमंत्री देश की जनता को वैश्विक आर्थिक संकट के लिए तैयार रहकर देशहित में अपने खर्चो, आयोजन, खानपान में कटौती कर त्याग करने का आह्वान कर रहे हैं।

२८ फरवरी से आरंभ हुए अमेरिका-ईजराइल-इरान युद्ध के दो माह से अधिक समय बित जाने और इस युद्ध से पुरी दुनिया के समक्ष उत्पन्न हुए तेल, गैस आपूर्ति की वैश्विक संकट और इस संकट के और गहराते जाने, नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी जी की इस संकट की लगातार पूर्व चेतावनी के बावजूद देश के प्रधानमंत्री मंत्री जी की कुटनीति, वैदेशिक नीति का यह हाल रहा की सभ्यता के आरंभ से मित्र रहे ईरान और रुस जैसे मित्र देशों को त्याग कर अमेरिका और इजरायल जैसे देशों के इशारों पर उनके पाले जाकर अमेरिका के कहने पर चलते हुए राष्ट्रीय संप्रभुता को अमेरिकी राष्ट्रपति के हाथों में सौंप कर भारत की जनता को भयंकर आर्थिक संकट में धकेल कर अब जनता से त्याग की अपेक्षा कर रहे हैं।

खुद प्रधानमंत्री जी और उनकी सरकार की रईसी और ठाठ-बाट दुनिया में जगजाहिर है, दुनिया के किसी भी देश के प्रधानमंत्री के काफिले में इतनी गाड़ीयां वह भी सबसे महंगी गाड़ियां नहीं होती जितनी हमारे देश के प्रधानमंत्री मंत्री जी के काफिले में होती है, साढ़े आठ हजार करोड़ के वायुयान में सफर करने वाले प्रधानमंत्री जी को पांच राज्यों के चुनाव में भारी महंगा चुनाव प्रचार अभियान और बंगाल-असम का चुनाव साम,दाम,दंड,भेद के सहारे व सरकारी तंत्रों का अनैतिक इस्तमाल कर जितने के बाद देश और देश की जनता की याद आई है, युद्ध से उत्पन्न तेल, गैस, फर्टीलाइजर के संकट की याद आई है।

प्रधानमंत्री मंत्री जी पुरे तड़क-भड़क के साथ एक रोड शो करते हैं और देश की जनता से पेट्रोल-डिजल का इस्तेमाल कम करने कहते हैं, आम जनता से पुरे एक साल विदेश यात्रा नहीं करने, सोना नहीं खरीदने, किसी भी तरह के आयोजन-कार्यक्रम में कम से कम खर्च करने यहां तक की खाने का तेल भी खाने-पीने में कटौती का आह्वान कर रहे हैं जो खुद भारत के सबसे ज्यादा विदेश यात्रा करने वाले हैं जिसका राष्ट्र को तो कोई लाभ नहीं हुआ जो की अब सामने आ चुका है, मोदी जी अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर खुद की छवि गढ़ने में इस तरह मशगूल रहे की वैश्विक स्तर पर देश की छवि सबसे निचले स्तर पर पहुंचा दिये है, रुपये की ऐतिहासिक गिरावट, महंगाई, ऐतिहासिक बेरोजगारी दर, भुख इंडेक्स में सोमालिया जैसे देश को पछाड़ चुके हैं, अमीर और गरीब के बिच का फासला अंग्रेजों के दौर से भी ज्यादा बढ़़ चुका है, प्रेस की स्वतंत्रता के मामले में हम गिरते ही जा रहे हैं, लोकतांत्रिक छवि धुमिल होती जा रही है और लोकतांत्रिक तानाशाही कवाले देश के रुप में पहचान बढ़ती जा रही है, संवैधानिक संस्थाओं के प्रति आम जनता का विश्वास लगातार कम होता जा रहा है।

मोदी जी आपने पिछले १२ वर्षो के अपने शासनकाल में देशहित की चिंता कम और अपनी व्यक्तिगत छवि व अपनी पार्टी की चिंता ज्यादा रही संवैधानिक संस्थाओं के सहारे सिर्फ चुनाव जितना ही आपका मकसद रहा है। आपकी कुटनीति और विदेश नीति का यह हाल है की सारे पड़ोसी देश हमसे दूर होते चले गये। ईरान और रुस जैसे हमारे अभिन्न मित्र हमसे दूर हो गये और इन सबके कारण आज देश के समक्ष भयंकर आर्थिक संकट का दौर शुरु हो चुका है ऐसे समय में खुद और अपने सरकार के खर्च में कटौती कर मितव्यता का उदाहरण प्रस्तुत करने के बजाय अपनी रईसी को तो बरकरार रखे हुए और जनता से त्याग की अपेक्षा कर रहे हैं। जब भी देश पर संकट आता है बतौर प्रधानमंत्री होने के संवैधानिक नाते के आप अपनी जिम्मेदारियों से पल्ला झाड़ कर नैतिकता और त्याग का उपदेश देने लग जाते हैं और इस तरह आप जनता पर ही सारी जिम्मेदारी थोपकर अपनी व्यक्तिगत छवि गढ़ने विदेश यात्रा पर निकल जाते हैं। देश पर आसन्न संकट को देखकर राष्ट्र के नाम संबोधन देने के बजाय तामझाम की रैली कर उसमें जनता से त्याग करने का आह्वान करते हैं यह आप की बतौर प्रधानमंत्री विफलता है, देश के साथ विश्वासघात है। अपनी इस विफलता और विश्वासघात के लिए देश की १४० करोड़ जनता से माफी मांगीये और नैतिकता के आधार पर अपने पद से इस्तीफा दिजिए।

भवदिय

रत्तीराम कोसमा
ब्लाक अध्यक्ष एवं विधायक प्रतिनिधि
दिल्ली राजहरा

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