सरकारी अस्पताल में हो रही थी जीवन दीप समिति द्वारा मरीजों से अवैध वसूली,

उच्च अधिकारियों से बात कर कराया बंद:- युवराज निवेंद्र सिंह टेकाम।
लोहारा के सरकारी अस्पताल में हो रही थी जीवन दीप समिति द्वारा मरीजों से 50 रुपए की वसूली, युवराज निवेंद्र सिंह टेकाम ने उच्च अधिकारियों से बात कर कराया बंद, लोगों को मिली राहत
बालोद :-
डौंडीलोहारा में संचालित शासकीय अस्पताल में इलाज के नाम पर जीवन दीप समिति द्वारा 50 रुपए वसूली किए जाने का मामला सामने आया है। जिसकी जानकारी लगते ही लोहारा के युवराज लाल निवेंद्र सिंह टेकाम ने मरीजों के हित में पहल करते हुए उक्त वसूली को विभाग के उच्च अधिकारियों से बात करके बंद कराया। तत्काल वे मामले की शिकायत मिलते ही अस्पताल पहुंचे और संबंधित मरीज और परिजनों सहित अस्पताल प्रबंधन से मिलें। इस तरह अधिक वसूली पर उन्होंने प्रबंधन सहित जीवनदीप समिति के पदाधिकारी के समक्ष नाराजगी जाहिर की। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के शासनकाल में आप लोगों ने काफी लूट मचाई है। अब यह बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। युवराज के नाराजगी के सामने जीवनदीप समिति की एक ना चली और फिर तत्काल अधिक वसूली को बंद कराया गया। आगे अब इस तरह से वसूली नहीं होने की बात कही गई। शासन के नियम के तहत सरकारी अस्पताल में महिलाओं,60 साल से अधिक उम्र और गर्भवती महिलाओं का पर्ची शुल्क लिया ही नहीं जाना है। इसके बावजूद जीवनदीप समिति द्वारा एक महिला मरीज से ₹50 का शुल्क लिया गया था। जिसके रसीद भी परिजनों ने दिखाए हैं। जिसपर तत्काल युवराज टेकाम ने संज्ञान लिया और उक्त सभी को बंद कराते हुए कहा गया कि अब इस तरह से वसूली नहीं की जाएगी। युवराज द्वारा किए गए इस पहल से लोगों ने काफी राहत महसूस की।
नए अस्पताल में नहीं है रानी झमित कुंवर का नाम, पर्ची में आज भी चल रहा, इस पर भी नाराजगी।

जीवनदीप समिति द्वारा जो पर्ची काटी जाती है उसमें आज भी राज परिवार से जुड़े रानी झमित कुंवर स्वास्थ्य केंद्र के नाम का उल्लेख है। जबकि वर्तमान में जो कांग्रेस शासन काल के तहत नया अस्पताल भवन बना है उसमें रानी झमित कुंवर के नाम का उल्लेख नहीं किया गया है, ना हीं किसी तरह से बोर्ड लगाया गया। इसको लेकर भी युवराज लाल निवेंद्र सिंह टेकाम ने नाराजगी जताई और कहा कि 1961 से अस्पताल का जो नाम चल रहा है वह नए अस्पताल में नजर नहीं आता । पर्ची सहित सारे दस्तावेजों में झमित कुंवर देवी का नाम है। तो अस्पताल में नाम क्यों नहीं लिखा गया है। इस व्यवस्था की भी मैं निंदा करता हूं। क्षेत्र में लगातार कांग्रेस की सरकार ने लूट मचा कर रखे थे। पर अब भाजपा सरकार में क्षेत्र के लोगों के साथ इस तरह से अन्याय नहीं होने दिया जाएगा। कहीं भी किसी तरह की दिक्कत होती है तो मरीज या परिजन उनसे संपर्क कर सकते हैं।स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधार के साथ अस्पताल में हो रही किसी भी तरह की परेशानी को वह आगे भी गंभीरता से लेंगे। साथ ही उन्होंने प्रबंधन और समिति के लोगों को हिदायत दी कि दोबारा इस तरह से शिकायत नहीं आनी चाहिए। उनकी नाराजगी को देखते हुए जीवनदीप समिति ने तत्काल ₹50 की जो वसूली की जा रही थी उस पर अब पूरी तरह से रोक लगा दी है।
जिला अस्पताल में ₹10 पर यहां 5 गुना ज्यादा वसूली।

ज्ञात हो कि बालोद के जिला अस्पताल तक में पर्ची का शुल्क ₹10 तक लिया जाता है। इससे ज्यादा नहीं लेते। लेकिन दूसरी ओर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र होने के बावजूद लोहारा के सरकारी अस्पताल में पर्ची शुल्क पांच गुना ₹50 जीवनदीप समिति द्वारा वसूल किया जाना अधिक प्रतीत होता है। जो कि समिति की मनमानी को उजागर करता है जिससे सरकारी अस्पताल आने वाले मरीज और परिजनों को आर्थिक समस्या भी होती है। ऐसे में लाल निवेंद्र सिंह टेकाम के प्रयास से उक्त अधिक वसूली को पूरी तरह से बंद करवा कर स्वास्थ्य क्षेत्र में मरीज और परिजनों लिए आर्थिक राहत की सुविधा दिलाने का विशेष प्रयास किया गया।

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