शिक्षा विभाग पर सवालियां निशान


✍️ तहसीलदार देवरी बंगला व बी आर सी डौंडीलोहारा शासकीय प्राथमिक शाला बीजाभाठा का मामला सुलझाने का किया प्रयास ✍️
✍️ विकास खंड शिक्षा अधिकारी व सहायक विकास खंड शिक्षा अधिकारी डौंडीलोहारा ग्रामीणों के साथ हुए बैठक में अनुपस्थित ✍️

डौंडीलोहारा —– शिक्षा सत्र की शुरुआत और शिकायतों का मंजर।एक तरफ खूब पढों आगे बढ़ो का नारा सरकार दें रही है और बीजाभाठा शासकीय प्राथमिक शाला में समस्या उत्पन्न।इस समस्या को लेकर ग्रामीणों ने जिला शिक्षा अधिकारी बालोद, कार्यालय कलेक्टर बालोद, संयुक्त संचालक दुर्ग और संभाग आयुक्त से शिकायत किया गया। शिकायत में विकास खंड शिक्षा अधिकारी व सहायक विकास खंड शिक्षा अधिकारी डौंडीलोहारा के कार्य शैली को संदेहास्पद बताया गया। उषा बोरकर शिक्षिका पर ठोस कार्रवाई नहीं हुई। उसके मूल शाला वापसी पर ग्रामीणों की नाराज़गी,युक्तियुक्तकरण से प्रभावित शिक्षिका नर्मदा साहू का स्थानांतरण को लेकर हुए समस्या व शाला में तालाबंदी तथा बच्चों को शाला न भेजने के मामले सुलझाने हेतु दिनांक 23/06/2025 को शासकीय प्राथमिक शाला बीजाभाठा में शाला प्रबंधन समिति, ग्रामीणों, सरपंच तथा जनपद सदस्य के साथ बैठक में उपस्थित हुए तहसीलदार देवरी बंगला व बी आर सी डौंडीलोहारा द्वारा उपस्थित सदस्यों के समक्ष पंचनामा तैयार किया गया । जिसमें ग्रामीणों ने अपना मांग रखा है कि नर्मदा साहू का युक्तियुक्तकरण के तहत स्थानांतरण निरस्त कर एक माह के भीतर वापसी तथा पूर्व में दोषी पाई गई शिक्षिका उषा बोरकर को निलंबित किया जाए। नहीं तो शाला में तालाबंदी किया जाएगा। इस पंचनामा अनुसार दिनांक 24/06/2025 से बच्चों को शाला भेजना प्रारंभ करेंगे। फिर हाल मामला शांत हुआ है, आगे क्या कार्रवाई होगी वो वक्त बताएगा।
विकास खंड शिक्षा अधिकारी हिमांशु मिश्रा व सहायक विकास खंड शिक्षा अधिकारी अश्वन साहू बैठक में उपस्थित नहीं हुए। इन दोनों अधिकारी शिक्षा व्यवस्था को पूरी तरह चौपट करके रखा है और मनमानी कर रहे हैं। सिविल सेवा नियम की पूरी तरह मजाक बना कर रख दिया है। ग्रामीणों द्वारा संयुक्त संचालक व संभाग आयुक्त दुर्ग के पास इन दोनों के खिलाफ शिकायत प्रस्तुत किए है,उसका क्या कार्रवाई की जाती है देखने वाली बात है।आज पूरे विकास खंड में शिक्षक से लेकर संकुल समन्वयक व प्राचार्य गण भी इस शिक्षा अधिकारी की दमण शोषणकारी नीति से परेशान हैं पर भय वश कोई सामने नहीं आता। शिक्षकों को पहले निलम्बन फिर जिला बदर करने का भय पैदा कर रखा है। इतना शिकायत व आऐ दिन अखबारों की सूर्खियो में रहने के बावजूद सत्तारूढ़ पार्टी के जनप्रतिनिधि चुप क्यों हैं।

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