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सामूहिक धर्मांतरण पर होगी उम्रकैद और 25 लाख का जुर्माना, भाजयुमो जिला मंत्री चेतन साहू ने मुख्यमंत्री और गृहमंत्री का जताया आभार

मोहला-मानपुर : छत्तीसगढ़ की विष्णु देव साय सरकार ने राज्य की सांस्कृतिक अखंडता और वनांचल की अस्मिता को अक्षुण्ण बनाए रखने की दिशा में एक बड़ा और साहसी कदम उठाया है। राज्य विधानसभा ने बहुप्रतीक्षित ‘छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य विधेयक 2026’ को सर्वसम्मति से पारित कर दिया है। यह नया कानून प्रदेश में अवैध धर्मांतरण, प्रलोभन, छल-कपट और विवाह के नाम पर होने वाले मतांतरण को रोकने के लिए देश के सबसे कठोर कानूनों में से एक माना जा रहा है। इस विधेयक के पारित होने से उन ताकतों पर नकेल कसी जाएगी जो लंबे समय से राज्य के भोले-भाले ग्रामीणों और आदिवासियों को गुमराह कर मतांतरण के खेल में संलिप्त थीं।

इस ऐतिहासिक निर्णय का स्वागत करते हुए भारतीय जनता युवा मोर्चा के जिला मंत्री चेतन साहू ने प्रदेश सरकार, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और गृह मंत्री विजय शर्मा के प्रति गहरा आभार व्यक्त किया है। चेतन साहू ने इस कानून को एक वैचारिक क्रांति बताते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ की माटी और यहाँ की प्राचीन संस्कृति को बचाने के लिए जो संघर्ष कभी एक जन-आंदोलन के रूप में सड़कों पर लड़ा जा रहा था, आज वही विचार कानून की दिशा में मजबूती से अग्रसर हुआ है। उन्होंने कहा कि यह कानून केवल एक विधिक दस्तावेज नहीं है, बल्कि उन हजारों कार्यकर्ताओं के संघर्ष की जीत है जिन्होंने वनांचल की पहचान बचाने के लिए अपना जीवन समर्पित किया है।

विधेयक के प्रावधानों पर चर्चा करते हुए साहू ने बताया कि अब छत्तीसगढ़ में अवैध तरीके से धर्मांतरण कराने वालों की खैर नहीं होगी। नए कानून के तहत सामान्य अवैध धर्मांतरण के मामलों में 5 से 10 वर्ष की जेल और 5 लाख रुपये के जुर्माने का प्रावधान किया गया है। वहीं, सामूहिक धर्मांतरण जैसे गंभीर अपराधों के लिए सजा को और भी कड़ा करते हुए 10 वर्ष से लेकर आजीवन कारावास यानी उम्रकैद तक की सजा और 25 लाख रुपये के भारी-भरकम जुर्माने का प्रावधान शामिल किया गया है। कानून में महिलाओं, बच्चों और अनुसूचित जाति व जनजाति वर्ग के लोगों के संरक्षण के लिए विशेष कड़ाई बरती गई है, ताकि समाज के इन वर्गों को किसी भी प्रकार के प्रलोभन या दबाव से सुरक्षित रखा जा सके।


चेतन साहू ने विशेष रूप से मोहला-मानपुर और बस्तर जैसे संवेदनशील वनांचल क्षेत्रों का उल्लेख करते हुए कहा कि इन इलाकों में लंबे समय से अवैध मतांतरण और प्रलोभन की शिकायतें मिल रही थीं। विदेशी शक्तियों और कतिपय संगठनों द्वारा आदिवासी समाज की मूल परंपराओं और संस्कृति को क्षति पहुँचाने का प्रयास किया जा रहा था। भाजयुमो जिला मंत्री ने प्रदेश सरकार के इस ऐतिहासिक फैसले को ‘वनांचल का सुरक्षा कवच’ बताते हुए कहा कि इससे न केवल अवैध धर्मांतरण पर अंकुश लगेगा, बल्कि आदिवासी समुदाय अपनी जड़ों से जुड़े रह सकेंगे।

प्रदेश सरकार ने यह भी सुनिश्चित किया है कि अब छत्तीसगढ़ में विवाह के नाम पर किया गया मतांतरण कानूनन शून्य और अमान्य घोषित किया जाएगा, ताकि कोई भी छल-कपट से किसी का धर्म परिवर्तन न करा सके। यदि कोई व्यक्ति अपनी मर्जी से धर्म परिवर्तन करना चाहता है, तो उसे 60 दिन पूर्व जिला मजिस्ट्रेट को विधिवत सूचना देनी होगी, जिससे पूरी प्रक्रिया पारदर्शी बनी रहेगी। चेतन साहू ने अंत में कहा कि युवा मोर्चा इस कानून के प्रति जन-जागरूकता फैलाएगा और छत्तीसगढ़ की माटी की अस्मिता को अक्षुण्ण रखने के लिए प्रतिबद्ध रहेगा।

मोहला से योगेन्द्र सिंगने की रिपोर्ट

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