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वनांचल क्षेत्र में स्थित शासकीय हाई स्कूल किल्लेकोडा के सभागार में सेवानिवृत्त शिक्षक का संकुल स्तरीय विदाई समारोह का आयोजन किया गया।

वनांचल क्षेत्र में स्थित शासकीय हाई स्कूल किल्लेकोडा के सभागार में सेवानिवृत्त शिक्षक का संकुल स्तरीय विदाई समारोह का आयोजन किया गया।

डौंडीलोहारा संवाददाता:-इस्लाम खान

डौंडीलोहारा : –

वनांचल क्षेत्र में स्थित शासकीय हाई स्कूल किल्लेकोडा के सभागार में सेवानिवृत्त प्रधान पाठक चंदर सिंह देहारी शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला झरन टोला के लिए संकुल स्तरीय विदाई समारोह काआयोजन किया गया था। जिसके मुख्य अतिथि चंदरसिंह देहारी (प्रधान पाठक) झरनटोला थे ।कार्यक्रम की अध्यक्षता अजय मुखर्जी प्राचार्य ने किया ।विशेष अतिथि के रूप में एन.आर. शिवना (प्रधान पाठक) किल्लेकोडा, कलीराम दादरे( प्रधान पाठक) प्राथमिक शालाअगरिया पारा, वाय.एस. मरकाम (वरिष्ठ व्याख्याता ),नीतिन देशमुख सी.एस.ई .किल्लेकोडा आदि थे ।कार्यक्रम का शुभारंभ मां शारदे के तैलचित्र का पूजन अर्चना के साथ हुआ। सरस्वती वंदना कुमारी चांदनी कुमारी गुंजन और यामिनी ने प्रस्तुत किया अतिथियों का स्वागत उपस्थित शिक्षक और शिक्षिकाओं द्वारा किया गया , अतिथियों के लिए स्वागत गीत कुमारी यामिनी एवं सहेलियों के द्वारा प्रस्तुत की गई

। इस अवसर पर सी.एस.ई .नितिन देशमुख ने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि देहारी सर का जन्म15.03. 1961 को हुआ था ।वे अपने कार्यकाल के दौरान बहुत सारे विद्यालयों में पदस्थ हुए ।जिनमें प्रमुख विद्यालय प्राथमिक शाला धनगांव ,प्राथमिक शाला भीम कान्हार,प्राथमिक शाला ककरेल, प्राथमिक शाला कुसुमकासा, प्राथमिक शाला भीमकन्हार ,हायर सेकेंडरी स्कूल भंवर मरा और झरन टोला एम .एस .में लगभग 15 वर्षों तक अपनी सेवा दिए, और वहीं से 31 मार्च 2023 को सेवानिवृत्त हुए। अजय मुखर्जी प्राचार्य ने कहा कि- शिक्षक को एक शिक्षक के तौर पर व्यावहारिक और अनुशासित होना आवश्यक है, जिससे बच्चे उनसे कुछ सीख सके, इसका उदाहरण देहारी सर हैं जो बड़े ही सरल व सहज स्वभाव के थे और उन्होने अनुशासित रहकर पूरा कार्यकाल पूर्ण किया, मैं उन्हें उनके सफल कार्यकाल पूरा करने के लिए ढेर सारी बधाई देता हूं। कार्यक्रम का सफल संचालन व संपादन डॉक्टर बी .एल .साहसी (व्याख्याता) ने किया।-संचालन के दौरान उन्होंने कहा कि– शिक्षकों को बच्चों का चरित्र निर्माण के साथ-साथ संयमित अनुशासित होना आवश्यक है तभी अपनी मंजिल तक पहुंच सकते हैं जिस प्रकार सभी पर्वतों पर मणि नहीं मिलती ,सभी हाथियों के मस्तक में मोती उत्पन्न नहीं होता ,सभी वनों में चंदन का वृक्ष नहीं होता ,ठीक उसी प्रकार अच्छे शिक्षक हर जगह नहीं मिलते ।मुख्य अतिथि की आसंदी पर बोलते हुए देहारी सर ने कहा कि –जिस प्रकार बड़ी मछली छोटी मछली को निगल जाती है, ठीक उसी प्रकार शिक्षा के क्षेत्र में जो चैनल चलता है ,जिनमें आंगनवाड़ी वाले लोग पालकों को दोष देते हैं, प्राथमिक शाला वाले लोग आंगनबाड़ी को दोष देते हैं, माध्यमिक शाला प्राथमिक शाला को दोष देते हैं ,और हाई स्कूल हायर सेकेंडरी माध्यमिक शाला को दोष देते हैं ,यह सिलसिला आज भी जारी है और अगर यह सिलसिला थम जाए तो एक तो मंजिल तक जाने में बहुत ही आसानी होगी अतः हमें क्रोध से बचने का प्रयास करना चाहिए ,क्योंकि क्रोध अंधा होता है। उक्त वक्त सोचने समझने की शक्ति क्षीण होती है अतः हमें इससे बचना चाहिए । वरिष्ठ व्याख्याता मरकाम सर ने कहा कि -इस विदाई के अवसर पर हम सब आपके साथ हैं आपकी सेवा व्यर्थ नहीं जाएगी बल्कि आपके आदर्श को उपस्थित शिक्षक साथी भी अनुसरण करते हुए आगे बढ़ते रहेंगे ।अंत में आभार प्रदर्शन एन.आर. शिवना प्रधान पाठक मा. शाला किल्लेकोडा ने किया ।उन्होंने इस अवसर पर कहा कि- हम ज्यादा कुछ नहीं दे सके ,केवल देते हैं प्रेम विदाई। इस अवसर पर संकुल के समस्त शिक्षक- शिक्षिकाएं उपस्थित थे

जिनमे प्रमुख रूप से सी.जी. पटेल व्याख्याता, जे.पी .बांधव व्याख्याता, डॉ बी.एल. साहसी व्याख्याता, हेमेंद्र साहू व्याख्याता, घनश्याम पटेल व्याख्याता, ललित देवहारी कलर्क, श्रवण यादव क्लर्क , जागेंद्र कुल्हार्य, अनीता मेश्राम, अनामिका गोयल,रामकुमार ठाकुर, वेद प्रकाश साहू, चमनलाल भंडारी अगरिया पारा, पवन कुमार डढ़सेना झरन टोला ,उमेद सिंह मंडावी मरकामटोला, साथ में पूर्व माध्यमिक शाला के छात्र- छात्राएं भी काफी संख्या में उपस्थित थे ।इस दौरान संकुल की ओर से प्राचार्य ,संकुल के समस्त शिक्षक शिक्षिकाएं –सेवानिवृत्त हुए प्रधान पाठक देहारी सर जी को एक छोटा सा उपहार (भेंट) दिया गया। और इसके साथ ही कार्यक्रम समापन की घोषणा की गई।

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