दाऊ मंदरा जी नाचा गम्मत महोत्सव में शामिल हुए संसदीय सचिव इंद्रशाह मंडावी

दाऊ मंदरा जी नाचा गम्मत महोत्सव में शामिल हुए संसदीय सचिव इंद्रशाह मंडावी
मोहला संवाददाता:-योगेंद्र सिंगने
मोहला:-
*नाचा केवल हास्य और लोक गीत-संगीत तक सीमित नहीं है बल्कि सामाजिक मुद्दों पर कटाक्ष करती है: इंद्रशाह मंडावी*
*नाचा महोत्सव: नाचा एक विधा है जो समाज को आइना दिखाता है।*
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नवीन जिला मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी में प्रथम बार जिला इकाई नाचा गम्मत लोक कलाकार कल्याण संघ मोहला तथा ग्राम कुल्हारदो के तत्वाधान में नाचा गम्मत महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है। नाचा के पुरोधा स्वर्गीय दाऊ दुलार सिंह मंदरा जी के याद में यह कार्यक्रम किया जा रहा है। दाऊ मंदराजी ने गावों के लोक कलाकारों को संगठित कर ‘नाचा‘ को एक नये आयाम तक पहुंचाया था। वहीं छत्तीसगढ़ के जनता में नाचा के प्रति आज भी गहरा आकर्षण और अनुराग बना हुआ है।
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*नाचा के पुरोधा स्वर्गीय दाऊ दुलार सिंह मंदरा जी*
दाऊ दुलार सिंह मंदरा जी नाचा के पुरोधा थे जिन्होंने अपना सर्वस्व जीवन नाचा में कुर्बान कर दिया। दाऊ मंदरा जी नाचा को हास-परिहास से कहीं ऊपर उठाकर सामाजिक जागरूकता और देश भक्ति का मंच मना दिया है। दाऊ मंदरा जी ने अपना सबकुछ लोककला को आगे बढ़ाने और लोक-कलाकारों को समृद्ध करने में लूटा दिया था।


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कार्यक्रम की विशिष्ट अतिथि छन्नी चंदू साहू ने कहा की हम नाचा के माध्यम से अपने धरोहर परंपरा को याद करते है। जिस धरोहर को भूलते जा रहे है उसे संजो के रखना है। हमे नाचा के माध्यम से बुराई को दूर कर नाचा के अच्छा पात्र को अपने जीवन में ग्रहण करना है।
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कार्यक्रम के अति विशिष्ट अतिथि बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्षा तेजकुंवर नेताम ने कहा की हमे सांस्कृतिक कलाओं के माध्यम से जीवन जीने की कला सीखनी चाहिए। नाचा गम्मत का आयोजन प्रशंसनीय है नाचा का आनंद लीजिए साथ ही नशा, मद्यपान जैसे सामाजिक बुराईयों से सभी दूर रहें।
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कार्यक्रम के मुख्य अतिथि संसदीय सचिव इंद्रशाह मंडावी ने कहा की नाचा एक विधा है जो समाज को आइना दिखाता है। नाचा हमेशा ज्वलंत मुद्दों पर चलता है, सही और गलत का राह दिखाता है। आज नाचा के माध्यम से प्रतिभा के सम्मान का मौका कुल्हारदो को मिला है हम सबको मिलकर प्रतिभाओं को सम्मान देना है। बच्चों को भी रुचि के अनुसार अपने प्रतिभा को दिखाने का मौका देना चाहिए।


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संसदीय सचिव ने कहा की नाचा केवल हास्य और लोक गीत-संगीत तक सीमित नहीं है बल्कि सामाजिक मुद्दों पर कटाक्ष करती है जैसे कि बीते दौर में नाचा के माध्यम से शराबबंदी, विवाह में फिजूल खर्ची, देश भक्ति जैसे विषयों को लोगों के सामने रखते थे। नाचा के माध्यम से बाल विवाह, परिवार नियोजन, छुआछूत, पर्यावरण, शिक्षा, स्वास्थ्य और औद्योगिकीकरण के विषयों पर समाज को जगाने का प्रयास करते है। उन्होंने कहा कि दाऊ मंदराजी जिस दौर में नाचा के माध्यम से गाँव-गाँव जाकर सामाजिक कुरीतियों पर कटाक्ष कर रहे थे वह दौर स्वतंत्रता संग्राम का दौर था। गुलाम भारत में अंग्रेजों के खिलाफ जंग छिड़ी हुई थी। समूचा राष्ट्र देश भक्ति की रंग में डूबा हुआ था। इन परिस्थितियों में मंदराजी भी अपनी नाचा पार्टी में देश भक्ति गीतों की प्रस्तुति देते थे लोगों के मन में आजादी की भावना भरते थे। अंग्रेजी हुकूमत को जब इसकी जानकारी हुई तो अंग्रेजो ने मंदराजी को गिरफ्तार कर लिया था इस तरह से छत्तीसगढ़ी लोक जीवन में नाचा का महत्वपूर्ण स्थान है।
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कार्यक्रम में मुख्य रूप से कुमारी बाई जुरेशिया, लगनू राम चंद्रवंशी, अनिल मानिकपुरी, नोहरु कुमेटी, लच्छू साबले, राजेंद्र जुरेशिया, कुमार कोरेटी, रामदेव मंडावी, महेश कुंजाम, सरस्वती ठाकुर, गमिता लोनहारे, जवाहर बोगा, रामेंद्र गोआर्य, राम प्रसाद घावड़े, दिलीप जुरेशिय, शेश्वरी धुर्वे, नगीना साहू, गंगा साहू, लता साव, मोहित पटेल, जगलाल कोमरे सहित नाचा गम्मत महोत्सव के अध्यक्ष सुकदेव धनकर, सचिव रवि शंकर निषाद, सुभाष पटेल, रामजी लाल धनगुन, उप कोषध्यक्ष गैंदलाल निषाद, भूषण भारद्वाज, वासुदेव गंगासागर, भैया राम कुंजाम, रमणीक चंद्रवंशी, नीतू सोरी, सदा शिव साकरे, भारत लाल हुपेंदी, धनेश भूआर्य, राजकुमार पटेल, निरंजन यादव क्षेत्र के नाचा गम्मत कलाकार तथा हजारों नाचा गम्मत के श्रोतागण उपस्थित थे।