जैविक निमास्त्र एवं आटे के घोल से होगा माहु किट का नियंत्रण

जैविक निमास्त्र, ब्रह्मास्त्र एवं आटे के घोल से होगा माहू किट का नियंत्रण
अंबागढ़ चौकी: परंपरागत कृषि विकास योजनांतर्गत “कोटूम” जिला स्तरीय जैविक किसान मेला का आयोजन मानपुर विकासखंड के ग्राम सीवनी में किया गया। जहां जिले भर से आए प्रगतिशील किसानों को जैविक खेती के विषय में जानकारी दिया गया। इस अवसर पर विधायक इंद्रशाह मंडावी, जनपद अध्यक्ष पुष्पा मंडावी, उपाध्यक्ष देवानंद कौशिक, सभापति रवेंद्र मांझी, राजू पोटाई, बृजबती धुर्वे, मंगतू कोमरे, मानसिंह टेकाम, किसान मित्र दौलत सिंह पोटाई, एनूक गाँवरे, मनहेर उईके, सरजू लाठिया, अमृत सोरी, भगत पुरामें, राजेंद्र, दिनेश, मनोहर, रोहित, रूपलाल, रामलाल धुर्वे सहित किसान साथी उपस्थित रहें।
उपसंचालक कृषि जिला मोहला मानपुर अंबागढ़ चौकी जे एल मंडावी ने बताया कि रजत जयंती के अवसर पर रासायनिक मुक्त खेती के उद्देश्य से यह किसान मेला का आयोजन किया गया है। जहां किसानों को परम्परागत कृषि विकास योजनांतर्गत जैविक खेती को बढ़ावा देने हेतु प्रोत्साहित किया जा रहा है साथ ही किसानों को शासन के द्वारा जैविक खेती हेतु सहायता भी प्रदान किया जा रहा है। इस अवसर पर कृषि विभाग की ओर से अनुविभागीय अधिकारी कृषि आर के पिस्दा, वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी जी पी धुर्वे, सुरेश दामले, विनोद निर्मल, पूर्णेंद साहू, उद्यानिकी विभाग से विकास कुजुर, हेमंत कोसे सहित अन्य अधिकारी कर्मचारी उपस्थित रहें।






कीट नियंत्रण के बताए गए उपाय
किसान मेला में किसानों को कीट नियंत्रण के विषय पर विस्तृत जानकारी दिया गया। कृषि विकास अधिकारी जितेंद्र नेताम ने बताया कि वर्तमान में अस्थिर मौसम से किसान फसलों में कीट प्रकोप से बहुतायत में पीड़ित है। जिससे छुटकारा पाने के लिए परंपरागत तरीका अपनाया जाकर निजात पाया जा सकता है। महत्वपूर्ण रूप से माहू का प्रकोप अत्यधिक देखने को मिलता है जो मुख्यतः तीन प्रकार के होते है। हरा, भूरा एवं चकतेदार पीठ वाली इनमें से भूरा माहू के कारण बहुत ज्यादा फसल क्षति होती है। खेत मे पानी की अधिकता, अधिक नत्रजन उर्वरको का उपयोग, सहनशील किस्मे की बुआई तथा गलत व असंतुलित दवाओं का उपयोग इसकी सक्रियता को बढ़ाती है। किट के लक्षण दिखने पर पहला कार्य फसल स्थिति के अनुसार खेत के पानी को कम करना चाहिए, प्रभावित एरिया के पौधे को अलग करना (भंगियाना) या खेत को भाग में पट्टीदार बाटना चाहिए जिससे किट प्रभावित क्षेत्र दायरे से ज्यादा न बढ़े। रोपाई समय या बयासी के बाद निरीक्षण पट्टी अवश्य छोड़नी चाहिए जिसकी दिशा पूर्व से पश्चिम रखा जाना चाहिए। साधन वाले किसान प्रकाश प्रपंच खेत मे लगा सकते है जिसे शाम 6 से रात्रि 9 बजे तक लाइट जला कर किट नियंत्रण कर सकते है।
किट नियंत्रण हेतु जैविक कीटनाशी मेटाराजियम अनासोपली एवं बेवरिया बेसियाना का 15 दिन के अंतराल में 2 स्प्रेय कर सकते है जिससे धान में सभी प्रकार के कीटो का नियंत्रण होता है।स्वयं से तैयार निमाश्त्र और ब्रम्हास्त्र ऐसी जैविक दवाओं से भी किट को नियंत्रित कर सकते है। कृषक विधि के अंतर्गत भूरा माहु नियंत्रण के लिए गेंहू आटे के 2 कप मात्रा को 1 लीटर पानी मे घोल कर प्रातः काल खेत के प्रभावित क्षेत्र में स्प्रे करने से किट के शरीर पर घोल पड़ने से बढ़ते धूप के साथ ही किट की मूवमेंट प्रभावित होती है तथा उनको नुकसान पहुचाने वाले फफूंद की वृद्धि होने से नियंत्रण का कार्य किया जा सकता है, अन्य विधियों में पूर्व में माहु प्रभावित खेत की मिट्टी का घोल बनाकर स्प्रेय करना भी प्रभावशील माना गया।
ग्रीष्मकालीन जुताई, फसल चक्र परिवर्तन, खेतो में पैरा न ठूठ प्रबंधन किट नियंत्रण के लिए बहुत की कारगर तरीके होते है।
किसान मेला के मुख्य अतिथि विधायक इंद्रशाह मंडावी ने किसानों को जैविक खेती को बल दिया। उन्होंने कहा कि रासायनिक खेती महंगी एवं हानिकारक है। रासायनिक उर्वरक एवं संशोधित बीज की लागत भी अधिक लगती है। संशोधित बीज के कारण फसल में बीमारी भी अधिक लगती है। इन सबसे छुटकारा पाने के लिए जैविक खेती ही उपाय है। परंपरागत तरीके से खेती करने से लागत भी कम आएगी साथ ही किसान भाई उपभोक्ता ही नहीं अपितु उत्पादक भी बनेंगे। विधायक ने कृषि विभाग के अधिकारियों से दलहन तिलहन के सम्बन्ध में अधिक से अधिक प्रचार करने के लिए निर्देशित किया। विभाग को प्रत्येक पीड़ित किसान के खेत तक जाकर वस्तुस्थिति की जायजा लेकर मुआवजा प्रकरण बनाने के लिए निर्देशित किया।
छोटे-छोटे गोष्ठी के माध्यम से किसानों तक पहुंचे कृषि अधिकारी
उपाध्यक्ष देवानंद कौशिक ने अपने उद्बोधन में किसान साथियों को जैविक खेती करने के लिए प्रोत्साहित किया साथ ही कृषि विभाग के अधिकारी कर्मचारी से भी आग्रह किया कि समय समय पर सक्रियता के साथ किसान साथियों को उन्नत खेती किसानी के लिए छोटे-छोटे स्तर पर चौपाल लगाकर जानकारी देने कहा। उन्होंने कहा कि अधिक उत्पादन के चक्कर में किसान साथी रासायनिक खाद का उपयोग करते है जिसका दूरगामी प्रभाव हमारे लिए हानिकारक है। वर्तमान परिदृश्य में बढ़ते रासायनिक खाद के उपयोग को एकाएक कम तो नहीं किया जा सकता है परन्तु कृषि विभाग तथा जैविक खेती करने वाले किसानों के पहल तथा समन्वय से जैविक खेती को निश्चित ही बढ़ावा मिलेगा।
मानपुर से जिब्राईल खान की रिपोर्ट