फल फूल ईश्वर का वरदान, उपयोग के पहले प्रकृति शक्ति को अर्पण करते हैं:इन्द्र शाह मंडावी

फल-फूल ईश्वर का वरदान, उपयोग के पहले प्रकृति शक्ति को अर्पण करते है: इंद्रशाह मंडावी
अंबागढ़ चौकी: आदिवासी समाज आदिकाल काल से प्रकृति का संरक्षण करते आ रहा है। प्रकृति प्रदत्त फल-फूल ईश्वर का दिया हुआ उपहार है, उपयोग के पहले इसे प्रकृति शक्ति को अर्पण करते है। इस तरह आदिवासी समाज प्रकृति के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित करती हैं। उक्त उद्गार मोहला-मानपुर विधायक इंद्रशाह मंडावी ने मटेवा सर्कल अंतर्गत गिधाली में आयोजित मरका पंडुम एवं परिचय सम्मेलन के दौरान दिया। उन्होंने कहा कि गोंड समाज का समृद्धशाली इतिहास रहा है। कि मरका पण्डुम पर्व में नए फलों, फसलों का अर्पण आराध्य देवी-देवताओं को किए जाने का परंपरा है। हमें अपनी संस्कृति और परंपरा आगे बढ़ाने की जरूरत है। समाज को शिक्षित करने की जिम्मेदारी है, बच्चों को पढ़ाने के लिए हम सबको आगे आने एवं जागरूक होने की आवश्यकता है। मरका पंडुम एवं परिचय सम्मेलन में गोंड समाज के संभाग अध्यक्ष मोहन हिड़को, तुलसी राम मरकाम, सुरेश दुग्गा, नोहर कुमेटी, पूर्णानंद नेताम, लक्ष्मी बाई कोला, कपिल कोमरे, संतु राम मरकाम, घनश्याम टेकाम, बल्लू राम कुमेटी, जंत्री बाई मरकाम, पद्मनी पौसार्य, अहिल्या बाई सोरी, सुभद्रा नेताम, श्याम सिंह कौड़ों सहित सामाजिक बंधु उपस्थित रहें।













सामाजिक रीति नीति को संरक्षित रखने का संकल्प
मरका पंडुम समारोह को संबोधित करते हुए तुलसी राम मरकाम, पूर्णानंद नेताम, सुरेश दुग्गा, मोहन हिड़को ने एक स्वर में सामाजिक रीति नीति को संरक्षित रखने का आह्वान कर संकल्प लिया। तुलसी मरकाम ने कहा कि आदिवासी समाज की एक समृद्ध रीति नीति एवं परंपरा है जिसे हमे बचा के रखना है एवं आने वाले पीढ़ी को गौरवशाली इतिहास को बताना हैं। प्रकृति शक्ति के प्रति आभार का यह समारोह केवल आदिवासी समाज करता है। वर्तमान परिदृश्य में बढ़ते भौतिकवादी अवसरों के बीच प्रकृति का संरक्षण एक चुनौती की तरह है। जिसे हमें बचाकर रखना है। वही समाज के रीति नीति को भी कुछ अवसरवादी एवं षडयंत्रकारी स्वयंभू प्रतिनिधि लोग बिगाड़ने का कार्य करते है जिनका हमे पुरजोर विरोध करना है।
मरका पण्डुम केवल उत्साह का नहीं अपितु समाज को संगठित करने का आयोजन
मरका पंडुम का विशेष महत्व है। यह त्योहार प्रकृति और अन्नदाता के प्रति कृतज्ञता प्रकट करने का प्रतीक है। इस दौरान पारंपरिक नृत्य और गीत-संगीत का आयोजन किया गया। पूरे गांव में भक्तिमय माहौल बना रहा। जहां सामाजिक बंधु खासकर महिलाएं प्रमुख रूप से उपस्थित रहे। आम, तेंदू, चार, चिरौंजी, महुवा आराध्य देव बुढ़ा देव को अर्पित किया गया।
संगठित समाज से ही विकास संभव, गलत का विरोध जरूरी
विधायक मंडावी ने भाषण में यह भी कहा कि संगठित समाज से ही विकास संभव है। आजकल समाज को तोड़ने वाले लोग भी सक्रिय हुए है जो समाज के इतिहास को गलत तरीके से परोस रहे है एवं अपनी राजनीतिक रोटी सेंकने के उद्देश्य से आदिवासी लोगों को बरगला रहे है साथ ही उनके साथ एकतरफा अत्याचार भी कर रहे है। समाज के अंतिम तबके के हमारे भाई जो शिक्षा से वंचित रहे है, जो वैचारिक रूप से मजबूत नहीं है उन्हें अपना गलत विचार दबावपूर्ण मानने के लिए मजबूर कर रहे है उनका हमे पुरजोर विरोध करना है।
मानपुर से जिब्राइल खान की रिपोर्ट